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काले धन पर केन्द्र से आगे चला सुप्रीम कोर्ट

In Uncategorized on जुलाई 4, 2011 at 9:16 पूर्वाह्न

मनोज जैसवाल: विदेशीं बैंकों में जमा काले धन के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट केन्द्र सरकार से आगे चल रहा है और स्वयं पहले करते हुए उसने सोमवार को एक विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश जारी कर दिया. अभी केन्द्र सरकार काले धन के सवाल पर हीला हवाली कर रही है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से विदेशों में जमा भारतीय धन के बारे में पता लगाने में मदद मिलेगी.

काले धन पर केन्द्र से आगे चला सुप्रीम कोर्ट सोमवार को कालेधन पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित कर दी और केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि सरकार कि वह एक नोटिफिकेशन जारी करके इस विशेष जांच दल को मान्यता प्रदान करे.

 इस विशेष जांच दल में रॉ के डायरेक्टर, रेवेन्यू सेक्रेटरी, रिजर्व बैंक के डिपुटी डायरेक्टर, सीबीडीटी के चेयरमैन, रेवेन्यू इंटेलिजेन्स के डीजी नारकोटिक्स कन्ट्रोल के डीजी, विदेश व्यापार विभाग के संयुक्त सचिव, सीबीआई के निदेशक तथा विदेश खुफिया विभाग के निदेशक शामिल हैं. असल में रॉ के डायरेक्टर को छोड़ दें तो पहले इन्हीं अधिकारियों को शामिल करके सुप्रीम कोर्ट ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था जिसमें रॉ के निदेशक को शामिल करके अब एसआईटी का स्वरूप दे दिया है. एसआईटी के चेयरमैन पूर्व न्यायाधीश जीवन रेड्डी होंगे जबकि वाइस चेयरमैन पूर्व न्यायाधीश एमबी शाह होंगे.

 सु्प्रीम कोर्ट ने एसआईटी के गठऩ के साथ ही निर्देश दिया है कि दोनों पूर्व न्यायाधीश समय समय पर जांच की प्रगति से अदालत को अवगत कराते रहेंगे. भारत में बढ़ते कालेधन की मानसिकता की देश के लिए अत्यंत खतरनाक बताते हुए कहा कि विदेशी बैंकों में जमा धन भारत की कमजोरी दर्शाता है. कालेधन पर एक बार फिर केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार काले धन के सवाल पर गंभीर नहीं है.

कोर्ट ने कहा है काले धन के दोषियों को दंड मिले.

सुप्रीम कोर्ट ने काला धन मामले में एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी)का गठन किया गया है. विदेशी बैंकों में जमा काले धन की जांच और उसे लाने की कोशिशों पर यह दल निगरानी रखेगा.

न्यायमूर्ति रेड्डी इस जांच दल के अध्यक्ष होंगे. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम बी शाह विशेष जांच दल के उपाध्यक्ष होंगे. न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति एस एस निज्जर की पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले में सरकार द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय समिति तुरंत एसआईटी से जुड़ जाए.

पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह उन सभी लोगों के नामों का खुलासा करे, जिन्हें काले धन से जुड़े मामले की जांच के तहत अधिकारियों ने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि अधिकारी उन लोगों के नामों का खुलासा नहीं करें, जिनसे लिष्टेनश्टाइन बैंक समेत विदेशी बैंकों में धन जमा करने के मामले में पूछताछ नहीं की गई है. न्यायालय ने यह फैसला जाने-माने वकील राम जेठमलानी और अन्य लोगों की याचिका पर दिया है . याचिका में न्यायालय से मांग की गई थी कि वह सरकार को विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने का आदेश दे.

काला धन गंभीर समस्या

अदालत ने एसआईटी से कहा कि वह काले धन से जुड़े मामलों से किस तरह निपटेगी, इस बारे में एक व्यापक कार्ययोजना भी तैयार करके पीठ के समक्ष जमा करे. एसआईटी गठित करने के अपने फैसले को न्यायसंगत ठहराते हुए पीठ ने कहा कि कई पुराने मामलों में भी अदालतें अपने संवैधानिक दायित्व पूरे करने के लिए ऐसे फैसले देती आई हैं.

कोर्ट ने यह भी कहा कि उसका दिन-प्रतिदिन जांच में शामिल होना मुश्किल है, क्योंकि न्यायालय के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि काले धन के मुद्दे को गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है और यह सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसी संपदा देश में वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास करे और विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले लोगों को दंड दे.

 एक ओर केन्द्र सरकार लगातार कालेधन के सवाल पर लीपापोती कर रहा है और प्रधानमंत्री से लेकर वित्तमंत्री तक सभी इस मुद्दे पर गोल गोल बातें कर रहे हैं ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने से उम्मीद बनती है कि काले धन के सवाल पर अब निर्णायक प्रगति हो सकेगी.

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  1. सुन्दर पोस्ट मनोज जी काले धन पर सरकार तो कुछ करेगी नहीं बस कोर्ट का ही सहारा है

  2. प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यबाद.
    मनोज जैसवाल

  3. नमस्कार मनोज जी सरकार लगातार कालेधन के सवाल पर लीपापोती कर रहा है और प्रधानमंत्री से लेकर वित्तमंत्री तक सभी इस मुद्दे पर गोल गोल बातें कर रहे हैं ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने से उम्मीद बनती है कि काले धन के सवाल पर अब निर्णायक प्रगति हो सकेगी.

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